शनिवार, 5 अप्रैल 2025

कर्तव्य !

 हे भारत जन के कर्णधार, ये धर्म तुझे बतलाता है !

अविरल निश्छल पथ पर बढ़ना कर्तव्य तुझे सिखलाता है !

जीवन में बाधाएं आएं, तो रुक कर हाथ बढ़ा देना,

अभिमान अगर आए तुझको, तो आंखों से समझा देना !

जो खड़ा हुआ जीवन रण में, बस शौर्य और साहस के बल,

उसको करने को युद्ध विरत करते हो क्यों तुम कुटिल छल !

तुम विजयी हो भी जाओगे तो कायर ही कहलाओगे,

जब प्रजा नहीं होगी तो फिर किसको अभिमान दिखाओगे !

कहकर दुर्योधन तुम्हें यहां इतिहास भुला देगा लिख लो,

ये पथ निश्चित ही अनुचित है, ये समय बता देगा लिख लो !

©दीपक तोमर शामली

प्रकाशित - अमर उजाला काव्य

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